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  2017-08-19

अब बच्चे चुटकियों में हल करेंगे गणित के जटिल सवाल!

OnlineCG शिक्षा। कहते हैं बच्चे देश के भविष्य हैं और उनके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए शिक्षा अनिवार्य है। मगर देखा गया है कि अधिकतर बच्चों में गणित को लेकर एक अनजान तरह का भय होता है। गणित के इसी भय को कम करने के लिए अब उन्हें सरल सूत्रों के जरिए गणित पढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्राइमरी-मिडिल स्कूलों में पहली बार वैदिक गणित को जगह दी जाएगी, जिससे बच्चे सेकंडों में सवाल हल कर पाएंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) प्रचलित गणित में ही वैदिक गणित के कुछ पाठ लागू करने का प्रस्ताव बना रहा है। इसके लिए दिल्ली के विशेषज्ञों के जरिए फिंगर मैथमेटिक्स, अवेकस समेत कई सरल विधियों पर शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया गया है। 17 साल बाद प्राइमरी-मिडिल कक्षाओं की किताबें रिवाइज की जानी है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने भी लर्निंग आउटकम निर्धारित किया है, जिसके मुताबिक स्कूलों में वैदिक गणित की पढ़ाई करवानी है। इसके बाद अब राज्य के 35 हजार स्कूलों में 50 लाख बच्चों को वैदिक गणित पढ़ने के लिए मिलेगी। अभी हालात यह है कि राज्य में आठवीं तक के बच्चों को जोड़, घटाना, गुणा, भाग जैसे मामूली सवालों को हल करने में दिक्कत हो रही है। इसलिए आठवीं तक के बच्चों को वैदिक गणित सिखाया जाएगा। वहीं इस विषय पर शिक्षाविदों का कहना है कि अभी मैकाले, अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के कोर्स इतने दुरुह और उबाऊ हैं कि बच्चों में गणित पढ़ने के प्रति रुचि तो दूर की बात, भय व्याप्त रहता है, इसलिए वे गणित में कमजोर होते जा रहे हैं। इस फैसले के बाद वैदिक गणित से बच्चों की न केवल गणितीय प्रतिभा विकसित होगी, बल्कि इस पर उनकी रुचि भी बढ़ेगी।

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