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  2017-04-06

अब कैसे बुझेगी प्यास?

OnlineCG रायपुर। गर्मी की शुरुआत होते ही प्रदेश के बांधों का गला धीरे-धीरे सूखने लगा है। अभी छत्तीसगढ़ के अधिकांश बांधों में तय क्षमता का आधा पानी ही उपलब्ध है। ऐसे में प्रदेश में ग्रीष्मकालीन फसलों और निस्तारी के लिए पानी की चिंता अभी से सताने लगी है। आपको बता दें कि प्रदेश के बड़े बांधों में 50% से भी कम पानी बचा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि पिछले साल की तुलना में इस समय बांधों में पानी की इस स्थिति के कारण संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे बचने के लिए जितना उपलब्ध है, उसका बेहतर मैनेजमेंट किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों की प्राथमिकता के आधार पर ही पानी छोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि गर्मी के समय तालाबों को भरने और निस्तारी के लिए पानी दिया जाना है। इसके साथ ही पूरी गर्मी में पानी को बचाकर भी रखना है। विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि पानी का सही मैनेजमेंट किए बिना अभी अगर सिर्फ 10 प्रतिशत पानी निस्तारी के लिए छोड़ा गया तो जून अंत तक पूरा बांध सूख सकता है। वहीं, छोटे बांधों को गर्मी के समय निस्तारी के लिए ज्यादा पानी नहीं दिया जा सकेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय अभयारण्यों के लिए भी पानी की उपलब्धता कम है। इसे देखते हुए बांधों से अभी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।

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