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  2016-12-06

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर राज्य सरकार करेगी मशक्कत

-9 दिसंबर को होगी बैठक

OnlineCG State | राज्य में कर्मचारी-अधिकारियों के करीब एक दर्जन कैडर के वेतनमान में विसंगतियां हैं। जिसे देखते हुए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में राज्य सरकार को काफी मशक्कत करनी होगी। सबसे बड़ी समस्या यह है कि राज्य के ढाई लाख कर्मियों को भत्ते पांचवें आयोग के ही मिल रहे हैं। ऐसे ही तमाम बिंदुओं और 7वें आयोग की सिफारिशों पर चर्चा के लिए 9 दिसंबर को सब कमेटी की बैठक बुलाई गई है।

                   इस कमेटी की अध्यक्ष सचिव शहला निगार हैं। कमेटी में संयुक्त सचिव वित्त एसके चक्रवर्ती, संचालक कोष जेपी पाठक, उप सचिव वित्त एके सिंह और अतिरिक्त सचिव जीएडी केआर मिश्रा सदस्य हैं। समिति को 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट ढांड समिति को सौंपनी है। उसके बाद ही नए वेतनमान को लागू करने का अंतिम फैसला हो पाएगा।

                    इससे पहले दोनों ही कमेटियों को राज्य के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी के विभिन्न कैडर के लिए लागू वर्तमान वेतनमान की विसंगतियों से जूझना होगा। करीब 11-12 कैडर के लाखों कर्मचारी वर्तमान वेतन-भत्तों से नाखुश हैं। राज्य के कर्मी केंद्र की ही तरह वेतन की मांग करते हैं। उनका कहना है कि छठवें वेतन आयोग के त्रुटिपूर्ण गणना के कारण उन्हें हर माह 500 से 3000 रुपए तक का नुकसान हो रहा है।

              राज्य में तो उन्हें भत्ते ही पांचवें आयोग की सिफारिशों के तहत मिल रहे हैं। इनमें पटवारी, आरआई, लिपिक, मंत्रालय-संचालनालय कैडर के ग्रेड-पे और मूल-वेतन में विवाद बना हुआ है। इसका निराकरण नहीं हुआ तो यह विवाद 7वें वेतनमान में भी बना रहेगा। शहला निगार कमेटी राज्य कैडर के लिए नए स्लैब निर्धारण पर विचार करेगी। साथ ही कमेटी राज्य शासन पर पड़ने वाले वित्तीय भार का भी आंकलन करेगी। एक अनुमान है कि राज्य पर करीब तीन हजार करोड़ का भार आएगा। नया वेतनमान साल 2017-18 से दिया जाएगा। वहीं एरियर्स का भुगतान दो या तीन किस्तों में देने पर विचार किया जा रहा है।

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