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  2016-11-29

शासन ने दिखाई सख्ती

- इंस्पेक्टर राज हुआ ख़त्म

OnlineCG Raipur। श्रम विभाग ने आजादी के बाद 4 नवंबर को सबसे बड़ा कदम उठाते हुए इंस्पेक्टर राज का खात्मा कर दिया था। उनकी भौगोलिक कार्य सीमा भी प्रदेशभर तय कर दी और बिना सूचना के छापों पर बैन लगा दिया। इससे नाराज होकर लेबर इंस्पेक्टर लामबंद हो गए। उन्होंने विरोध का झंडा उठा लिया। उन्होंने पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की। उन्होंने 22 नवंबर से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर जाने चेतावनी पत्र दे दिया। इसे सरकार ने अनुशासनहीनता,कर्तव्यविमुखता व कदाचरण मानते हुए 39 श्रम निरीक्षकों को नोटिस थमाकर तीन दिनों में जवाब देने के निर्देश दिए। राज्य सरकार ने श्रम विभाग के लिए जो नए कानून लागू किए हैं उसका विरोध करते हुए लेबर इंस्पेक्टरों ने पूरे प्रदेश में बगावत का बिगुल फूंक दिया था। उन्होंने नए कानून वापस न लेने पर बेमुद्दत काम ठप करने की चेतावनी दे डाली थी।

                      लेबर इंस्पेक्टरों के अचानक इस कदम से पहले तो विभाग के होश उड़ गए, लेकिन बाद में उसने सभी बगावतियों को नौकरी से निकालने का फैसला कर लिया। इसके लिए पहले 39 लेबर इंस्पेक्टरों को नोटिस जारी की गई। इसकी भनक लगते ही उन्होंने सरकार के फैसलों से सहमति जता दी। विभाग के अंदर यह पूरा ड्रामा पिछले हफ्तेभर चला। वहीं लेबर कमिश्नर अविनाश चंपावत की नोटिस का जवाब विभाग के ई-मेल पर मांगा गया। और यह भी कहा गया कि जवाब न मिला तो अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी जाएगी। बताया जाता है कि विभाग इस बात को लेकर निश्चिंत था कि कानूनों में बदलाव मोदी सरकार के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के सपनों को साकार करने लिया गया है, इस वजह से उस पर कोई आंच नहीं आएगी। सूत्रों के मुताबिक इसके पहले विभाग ने ऊपर से भी कड़ी कार्रवाई, जो बर्खास्तगी तक हो सकती थी, पर सहमति ले ली थी। इसलिए उसने नोटिस जारी करने के बाद वेटिंग में पड़े श्रम निरीक्षकों की सूची से धूल झाड़ी और नियुक्ति के प्रावधानों को खंगाला जाने लगा। यानी अफसर और विभाग एक दूसरे की ताकत तौलते रहे आखिरकार इंस्पेक्टरों ने सरेंडर कर दिया।

प्रदेश में करीब 100 इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर हैं। पहली बार इतने सारे लोगों को एक साथ नोटिस दिया गया था। चर्चा है कि बगावत की योजना रायपुर में बनी थी। हालांकि एक निरीक्षक ने खुद को मामले से अलग कर लिया था। अब नोटिस के बाद श्रम निरीक्षकों से मिले जवाबों का परीक्षण चल रहा है।

वहीं श्रम निरीक्षकों की प्रमुख मांगों में मैदानी कार्यालय प्रमुखों द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षकों को आबंटित कार्यक्षेत्र समाप्त कर दिया गया है इसे तत्काल निरस्त कर पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए।

कार्यालय प्रमुख को ही श्रम निरीक्षकों के बीच काम व क्षेत्र बांटने व दायित्व निर्वहन कराया जाए। वेब पोर्टल में जांच करने का जो सिस्टम बनाया गया है उससे श्रम निरीक्षक असहमत हैं। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल एवं असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल द्वारा सौंपे दायित्वों से मुक्त किया जाए। एमपी में बहुत पहले ही श्रम निरीक्षकों को इस दायित्व से मुक्त कर दिया गया है। छग दुकान स्थापना अधिनियम 1958 का कार्य नगरीय निकायों द्वारा किया जा रहा है उसे श्रम विभाग को लौटाया जाए।

वहीं नये कानून में इंस्पेक्टर राज खत्म, श्रम निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र की भौगोलिक सीमाएं खत्म, 100 या कम कर्मचारी वाले संस्थान जांच से मुक्त विभाग के वेब पोर्टल पर होगा पूरा सिस्टम रन, औद्योगिक हादसे के सबूत तत्काल वेब पोर्टल में

डालने होंगे

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