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  2016-11-07

काबुलीवाला का मुफ्त इलाज करवाएंगे मंत्री अजय चंद्राकर, मदद करने के लिए नियमों को किया शिथिल

OnlineCG News। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा वहां के लोगों को हर तरह की मदद देने की बात सुनकर एक गरीब और बीमार अफगानी दिल का इलाज कराने भारत आ गया। दिल्ली में कई दिन भटकते हुए, रायपुर में रहने वाले अफगानी पठानों के पास पहुंचा। जहां से वह राज्य के संजीवनी कोष में मदद मांगने गया और उसकी सारी मुश्किलें आसान होती गईं। स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर से यूं तो सुरक्षा कारणों से मिलना मुश्किल था लेकिन उसकी कहानी जानकार उसे अंदर भेजा गया। मंत्री चंद्राकर के सामने पहुंचकर नादिर ने अपने इलाज और जांच का पूरा ब्योरा उनके सामने रखा। मेडीकल रिपोर्ट और अफगानी का हाल देखकर मंत्री चंद्राकर ने उसी समय नियमों की पड़ताल की। उसके बाद इलाज करवाने का फैसला लिया गया। जैसे ही उसे कहा गया कि उसका इलाज हो जाएगा। अफगानी की आंखें भर आईं। उसने मंत्री चंद्राकर और वहां मौजूद अफसरों को गले लगाया। उनका हाथ चूमा और दोनों हाथ उठाकर खूब दुवाएं दीं। उसने बताया कि उसके खान भाइयों के पास पैसे नहीं थे, फिर भी वे उसे लेकर हॉस्पिटल गए और जांच करवाई। वह उनका भी हमेशा शुक्रगुजार रहेगा। अफगानी की जिंदगी बचाने के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट ने सरकार से सारे नियमों को शिथिल करने की सिफारिश की है। संजीवनी सहायता कोष ही एक मात्र विकल्प है, जिसके तहत सीएम सारे नियमों को शिथिल करते हुए किसी को भी इलाज के लिए मदद दिलवा सकते हैं। हालांकि राज्य में विदेशी तो दूर, दूसरे राज्य के मरीजों का मुफ्त इलाज करवाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। अफसरों ने बताया कि मुख्यमंत्री कोष से दो-तीन दिन में पैसे अप्रूव हो जाएंगे और उसकी एंजियोप्लास्टी कर दी जाएगी। वहीं छत्तीसगढ़ के हेल्थ मिनिस्टर अजय चंद्राकर ने बताया कि नादिर को इलाज की तुरंत जरूरत है। छत्तीसगढ़ सरकार संवेदनशील है। उसकी इलाज में पूरी मदद की जाएगी। छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका है, जब सरकार ने खुद एक विदेशी के फ्री इलाज के लिए सारे नियमों को शिथिल रखते हुए पहल की है। कैसे पहुंचा नादिर मंत्री चंद्राकर के पास? मदद की आस में पहले दिल्ली और फिर रायपुर आए नादिर ने देखा कि उसके अफगानी भाई चादर और तकिये के कवर बेचकर गुजर करते हैं। किसी के पास इतने पैसे नहीं थे कि उसका इलाज करवा सकें। डाॅक्टरों ने जब उसे इलाज का खर्च बताया था, तभी उसने कह दिया था कि इतने पैसे तो उसके पास नहीं है। वह मायूस हो गया। वह तलाश करने लगा कि पीएम मोदी ने जिस तरह से मदद करने की बात कही है वो कहां मिलेगी? इसी बीच उसके खान भाइयों को संजीवनी कोष के बारे में पता चला। वे उसे लेकर संजीवनी के दफ्तर पहुंचे। उसकी हकीकत जानकर सब हैरान रह गए। उसे सलाह दी गई कि सीधे सीएम या हेल्थ मिनिस्टर से मिलकर मदद मांगे। उसके बाद वह हेल्थ मिनिस्टर के बंगले पहुंचा। नादिर की प्रारंभिक जांच कर ली गई है। एस्कार्ट हार्ट सेंटर के डाक्टरों ने बताया है कि तीन नसों में ब्लॉकेज है। तुरंत स्टंट नहीं डाला गया तो कभी भी हार्ट अटैक हो सकता है।

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