Online Chhattisgarh

  2016-10-12

सिर्फ दो साल में यह गांव बना आदर्श, पढ़ें ग्रामवासियों के जज़्बे की कहानी

OnlineCG Bureau। लगातार आगे बढ़ने और बाकी दुनिया के कदम से कदम मिलाकर चलने का जज्बा देखना हो तो चलिए रायखेड़ा। राजधानी से महज 38 किमी दूर तिल्दा का यह गांव दो साल पहले आदर्श घोषित हुआ, और फिर लोगों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सबसे पहले स्वच्छ भारत अभियान में पूरे गांव को क्लीन किया। एक-एक करके 20 महिला स्वसहायता समूह खड़े हो गए। फिर महिला-पुरुषों के समूहों ने खुले में शौच के खिलाफ ऐसी जागरुकता छेड़ी कि कुछ माह पहले गांव को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया। बात यहीं खत्म नहीं हुई, अब पूरे गांव में कंप्यूटराइजेशन का दौर है। दर्जनभर घरों में डेस्कटॉप लगे हैं, इतने ही युवा लैपटॉप पर हैं।

इस गांव से हर पत्र व्यवहार, यहां तक कि शिकायतें भी मेल की जा रही हैं। आलम ये हैं कि रायपुर जैसे डेवलप जिले में रायखेड़ा पहला गांव बनने जा रहा है,जो डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में वाई-फाई जोन हो जाएगा। करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में दो साल पहले तक वही तमाम समस्याएं थीं, जिनसे हर गांव जूझते हैं। पहुंचानेवाली सड़क कच्ची, गंदगी और बदइंतजामी, खुले में शौच और जबर्दस्त पिछड़ापन। खुद गांव के ही लोग हलाकान थे।

एक दिन गांव के लोगों और तमाम पंचायत प्रतिनिधियों ने तय किया कि बहुत हुआ, हालात बदलने पड़ेंगे। यहां से शुरू हुआ बदलाव का सिलसिला। सबसे पहले तय हुआ कि इसे आदर्श ग्राम पंचायत में तब्दील किया जाए। इसके लिए दो बड़े काम करने थे, गंदगी दूर करना और छोटे-छोटे काम गांव में ही उपलब्ध करवाना। सफाई के लिए पूरा गांव खड़ा हो गया। इस बीच, प्रशासन की सलाह पर महिला स्वसहायता समूह बनने की शुरुआत ही। महिलाओं के इन समूहों ने ऐसी क्रांति लाई कि हर अच्छे काम के लिए महिलाओं का एक समूह खड़ा हो गया। यही सबसे बड़ी ताकत बनी और गांव को आदर्श पंचायत का तमगा मिल गया।

देश में स्वच्छ भारत अभियान जैसे ही शुरु हुआ, इस गांव के लोगों ने सबसे पहले सफाई का ही बीड़ा उठाया। कई महिला समूह तथा पुरुषों की टोलियां सुबह 4 बजे उठकर न सिर्फ सफाई करतीं, बल्कि खुले में शौच के लिए जा रहे लोगों को जागरुक भी करने लगीं। इस तरह शुरुआत हुई हर घर में शौचालय की। ये हर घर में इतनी तेजी से बने कि प्रशासन की एक टीम ने पिछले महीने इस गांव का दौरा करने के बाद इसे पूरी तरह खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया।

रायखेड़ा के दस किमी के दायरे में बंगोली, सारागांव, धनसुली, सोनतरा, मुर्रा, चिचोली समेत कई बड़े गांव हैं। पर सबसे ज्यादा अपडेट रायखेड़ा ही है। यह 12वीं तक स्कूल, एक निजी बैंक और उपस्वास्थ्य केंद्र है। सभी पक्के भवनों में हैं। यहां तक कि कांजी हाउस और राशन दुकान भी पक्के भवन में है। गांव में पढ़ाई की जागरुकता को देखते हुए एक निजी स्कूल भी खुल गया है। हालांकि सरकारी स्कूल के नतीजे भी 90 फीसदी हैं। इस गांव के लोग कलेक्टर-एसपी से लेकर पीएमओ तक, अपनी शिकायतें सीधे मेल कर रहे हैं। आसपास के किसी गांव में इतने कंप्यूटर और लैपटॉप नहीं हैं, जितने यहां हैं। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में रायखेड़ा जिले में पहला वाई-फाई जोन होगा। जिला पंचायत सीईओ के मुताबिक इसी हफ्ते पहला सिस्टम गांव के स्कूल में लगाया जा रहा है। जिला पंचायत सीईओ नीलेश कुमार के मुताबिक, डेढ़ से दो साल में रायखेड़ा की तस्वीर बदल गई है। यह जिले का पूरी तरह से आदर्श गांव है। इतनी कोशिश और गांव करेंगे तो प्रशासन उन्हें इसी तरह डेवलप करना चाहेगा।

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