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Pooja Sharma   2017-12-16

भारत के 5 प्रमुख शनि मंदिर जहां मिलती है शनि के बुरे प्रभावों से तत्‍काल मुक्ति

OnlineIndia धर्म। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। वहीं माना तो यह भी जाता है कि मनुष्य के हर अच्छे और बुरे कर्मों का फल शनिदेव ही देते हैं। इसलिए शनि की दशा या साढ़ेसाती लगते ही व्यक्ति के अच्छे या बुरे दिन शुरु हो जाते हैं और जिसके जैसे कर्म होते हैं, उसे वैसा ही फल भी भोगना पड़ता है। मगर कहा जाता है कि शनिदेव को प्रसन्न कर लिया जाए तो व्यक्ति के सारे कष्ट एक पल में ही दूर हो जाते हैं और उसका अच्छा समय शुरु हो जाता है।

तो चलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के पांच प्रमुख शनि मंदिरों और उनकी विशेषताओं के बारे में।

1. महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर:- महाराष्ट्र में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर को कई लोग शनि देव का जन्म स्थान भी मानते हैं। यहां शनिदेव की प्रतिमा खुले में स्‍थापित है उनका कोई मंदिर नहीं है यानी ना तो कमरा है और ना ही कोई छत। आपको बता दें कि शिंगणापुर की शनिदेव प्रतिमा लगभग 5 फीट 9 इंच ऊंची और लगभग 1 फीट 6 इंच चौड़ी है।

2. तिरुनल्लर का शनि मंदिर:- तमिलनाडु के तिरुनल्लर में बना शनिदेव का यह मंदिर नवग्रह मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की मान्यता है कि शनिदेव के प्रकोप के कारण अगर किसी को बदकिस्मती, गरीबी और अन्य बुरे प्रभावों का सामना करना पड़े तो इस मंदिर में भगवान शिव की अराधना जरूर करनी चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से शनि के सभी बुरे प्रभावों से तत्‍काल छुटकारा मिल जाता है।

3. इंदौर का शनि मंदिर:- जूनी इंदौर में स्थित है भगवान शनिदेव का एक प्राचीन मंदिर। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह हिंदुस्तान का ही नहीं विश्‍व का सबसे प्राचीन शनि मंदिर है। मान्‍यता तो यह भी है कि इस मंदिर में शनिदेव स्वयं पधारे थे। इस मंदिर के बारे में प्रचलित कथा है कि लगभग 300 वर्ष पूर्व यहां एक स्‍थान पर एक 20 फुट ऊंचा टीला था जहां यहां के वर्तमान पुजारी के पूर्वजों ने मंदिर की स्‍थापना की थी।

4. ग्वालियर का शनिचरा मंदिर:- मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मुरैना के एंती गांव में शनिदेका प्रसिद्ध त्रेतायुगीन मंदिर है। इस प्रतिमा के बारे में किंवदंती है कि ये आसमान से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित हुआ है। कहा तो यह भी जाता है कि महाराष्ट्र के शिंगणापुर शनि मंदिर की शनि शिला भी इसी पिंड का एक अंश है। वहीं मान्यता है कि हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराकर उन्हें मुरैना पर्वतों पर विश्राम करने के लिए छोड़ा था, इसीलिए इस मंदिर के बाहर हनुमान जी की मूर्ति भी स्थापित है।

5. दिल्ली का शनि तीर्थ:- दिल्ली के महरौली में असोला, फतेहपुर बेरी में स्थित है शनि तीर्थ। ऐसा माना जाता है कि यहां शनि देव की सबसे बड़ी मूर्ति स्‍थापित है जो अष्टधातुओं से बनी है।

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