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OnlineIndia   2018-01-11

इस गांव में 56 मौतें हो चुकी है लेकिन मेकाहारा में नहीं कराना चाहते इलाज

OnlineIndiaगरियांबद। किडनी प्रभावित सुपेबेड़ा के मरीज एक बार फिर मेकाहारा से इलाज अधूरा छोड़कर वापस घर लौट आए हैं। ये दूसरी बार है जब सुपेबेड़ा के मरीजों को मेकाहारा से इलाज अधूरा छोड़कर वापिस लौटना पड़ा है। मरीजों ने मेकाहारा में हुए इलाज पर कई तरह के सवाल खड़े किए हैं साथ ही भविष्य में दोबारा मेकाहारा नहीं जाने की बात कही है। यही नहीं गांव के दूसरे 19 गंभीर मरीजों ने भी इलाज के लिए मेकाहारा नहीं जाने को लेकर देवभोग बीएमओ को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है।

मेकाहारा में कार्यरत छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध नफ्रोलॉजिस्ट पुनीत गुप्ता ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों को बेहतर इलाज का भरोसा दिया था और मेकाहारा में सुपेबेड़ा के नाम से 5 बिस्तर का अलग से वार्ड बनाने का वादा किया था। पुनीत गुप्ता के आश्वासन के बाद 4 दिसंबर को सुपेबेड़ा के 6 गंभीर मरीज इलाज के लिए रायपुर आने को तैयार हुए थे।

एक महीने बाद ही इलाज के लिए गए सभी मरीज इलाज बीच में ही छोड़कर घर वापिस लौट आए हैं। उन्होंने भविष्य में दोबारा मेकाहारा नहीं जाने की कसम खाई है। पीड़ित मरीजों को संजीवनी से निशुल्क इलाज होने का भरोसा दिलाकर ले जाया गया था लेकिन बाद में वहां के डॉक्टरों द्वारा बाहर से दवाई और इंजेक्शन मंगवाए गए।

पीड़ित मरीज पुरंधर पुरैन ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब तक डॉ पुनीत गुप्ता मौजूद रहते थे तब तक दूसरे डॉक्टरों का व्यवहार ठीक रहता था। लेकिन उनके जाने के बाद ही डॉक्टर रंग बदल लेते थे। उन्हें जलील करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे। यहां बेहतर इलाज नहीं होने के कारण उनके स्वास्थ्य में सुधार होने की बजाय बिगड़ रहा था इसलिए वे परेशान होकर घर वापिस लौट आए हैं।

सुपेबेड़ा गांव कई साल से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। अब तक इस बीमारी से 56 लोगों की मौत हो चुकी है। 180 से ज्यादा लोग किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं, जो इलाज के अभाव में इधर उधर भटक रहे हैं।

इस घटना के बाद गांव के लोगों में काफी आक्रोश भरा हुआ है। अब गांव का कोई भी मरीज मेकाहारा जाने को तैयार नहीं है। गंभीर रुप से पीड़ित 19 मरीजों ने मेकाहारा में इलाज नहीं कराने का एक लिखित पत्र देवभोग बीएमओ डॉ सुनील भारती को सौंपा है। 

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