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OnlineIndia   2018-01-12

भू राजस्व विधेयक लिया गया वापस, भाजपा और कांग्रेस में मची श्रेय लेने की होड़

OnlineIndia रायपुर। भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पर विपक्ष ही नहीं अपितु अपनी ही पार्टी के आदिवासी नेताओं के मुखर विरोध के बाद आखिरकार सरकार झुक ही गई। इसके बाद इस विधेयक को वापस ले लिया गया। बता दें कि मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले अजजा आयोग के अध्यक्ष जीआर राणा और संसदीय सचिव सिद्धनाथ पैकरा के साथ भाजपा के प्रदेश भर के आदिवासी नेता पहुंचे थे। इतना ही नहीं मंत्री महेश गागड़ा भी आदिवासी नेताओं के साथ सीएम से मिलने पहुंचे। इन नेताओं ने स्पष्ट बता दिया कि अगर यह कानून लागू हुआ तो चुनाव में वे आदिवासी क्षेत्रों में वोट मांगने नहीं जा पाएंगे। इसके बाद यह साफ हो गया कि इस विधेयक को वापस लेने के अलावा सरकार के पास कोई और विकल्प नहीं है।

आपको बता दें कि इस विधेयक की वापसी के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। प्रदेश के कृषि एवं जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सरकार पहले ही विधेयक को वापस लेने का मन बना चुकी थी। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार को निर्णय और उन निर्णयों पर आने वाली प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए और भाजपा सरकार ने जनभावना के अनुसार काम कर संवेदनशीलता का परिचय दिया। भाजपा अजजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद रामविचार नेताम ने कहा कि इस फैसले से छत्तीसगढ़ में भाजपा और मजबूत होगी। इससे आदिवासी समाज में अच्छा संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी हितैषी सरकार है यह साफ हो गया है। अजजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धनाथ पैकरा ने कहा कि इस निर्णय से लोकतंत्र मजबूत हुआ है।

इधर कांग्रेस ने राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय के उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दवा कड़वी हो तो बदलनी चाहिए। कांग्रेस ने कहा है कि क्या भाजपा आदिवासियों को मरीज समझती है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि इस बयान के लिए मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनके दबाव के कारण ही सरकार बिल वापस लेने के लिए मजबूर हुई है।

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