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Pooja Sharma   2018-02-15

तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचेंगे ईरानी राष्ट्रपति, मिलकर बनाएंगे पाकिस्तान के खिलाफ रणनीति

OnlineIndia डेस्क। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी भारत के अपने तीन दिवसीय दौरे के लिए आज शाम हैदराबाद पहुंचेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच परस्पर हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय ने पहले बताया था कि ईरान के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और परस्पर हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। रूहानी आज शाम चार बजे शहर के बेगमपेट हवाईअड्डे पर पहुंचेंगे

आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि ''वह शाम को साढ़े छह बजे मुस्लिम बुद्धिजीवियों, विद्वानों और धर्म गुरुओं को संबोधित करेंगे।'' रूहानी की यात्रा के संबंध में कल राज्य सचिवालय में समन्वय बैठक के दौरान तेलंगाना के मुख्य सचिव शैलेन्द्र कुमार जोशी ने विभिन्न विभागों से फुलप्रूफ योजना बनाने को कहा था। इक्कीस सदस्यीय शिष्टमंडल के साथ आए ईरान के राष्ट्रपति दो दिन तक हैदराबाद में रुकेंगे। सूत्र ने बताया कि वह हैदराबाद में रह रहे ईरानी नागरिकों के साथ बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति रूहानी ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में कल जुमे की नमाज अदा करने के बाद जलसे को संबोधित करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस मौके पर विभिन्न चिंतनधाराओं के इस्लामी बुद्धिजीवी मौजूद रहेंगे।

हो सकता है इस दौरान भारत-ईरान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ कोई रणनीति तैयार करें। पिछले साल फरवरी में जब भारतीय सेना ने कश्मीर में आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था, उसी दिन ईरान ने भी पाकिस्तान पर हमला किया था। उस रात भारतीय सेना के कमांडोज ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर 38 आतंकी मार गिराए थे। उसी समय पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर ईरान ने मोर्टार दागे थे। ईरान के बॉर्डर गार्ड्स ने सरहद पार से बलूचिस्तान में तीन मोर्टार दागे थे। पाकिस्तान और ईरान के बीच 900 किलोमीटर की सीमा है।

ईरान इसलिए भी पाकिस्तान से नाराज है, क्योंकि दोनों देशों की सीमा पर तैनात ईरान के दस सुरक्षाकर्मियों को 2015 में पाक के आतंकवादियों ने मौत के घाट उतार दिया था। ये मानकर चलिए कि ईरान-पाकिस्तान के बीच संबंध कभी सामान्य नहीं होंगे। कारण ये है कि पाकिस्तान ईरान के शत्रु सऊदी अरब का पिछलल्गू है। गौरतलब है कि यह वही ईरान है जिसने 1965 में भारत के साथ जंग में पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया था। इस बीच, ईरान-पाकिस्तान में इसलिए भी तनातनी रही है, क्योंकि ईरान शिया देश है तो पाकिस्तान सुन्नी महुल मुस्लिम देश है।

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