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Roshan Bharti   2018-03-20

मानवता हुई शर्मसार, आंबेडकर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से मरीज की मौत

OnlineIndia रायपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सोमवार को फिर मानवता शर्मसार हुई है। बिलासपुर से कीमोथेरेपी कराने आए मरीज को आंबेडकर अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर डॉक्टरों ने दो बॉटल ग्लूकोज चढ़ाकर छुट्टी कर दी। लेकिन कुछ देर बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी तो परिजन कीमोथेरेपी कराने के लिए टोकन लेकर वार्ड के अंदर जाने लगे। संजीवनी कार्ड न होने की वजह से गार्ड ने मरीज को अंदर नहीं जाने दिया और ह्वील चेयर पर उपचार के इंतजार में बैठे मरीज की मौत हो गई।

मृतक के परिजन ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते मौत हुई है। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज क्रिटिकल कंडीशन में अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हुई है। मस्तूरी हिर्री बिलासपुर निवासी हिमांशु साहू ने बताया कि उसके दादा भोंदल प्रसाद साहू कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। उनको कैंसर प्रथम स्टेज पर था। बीती रात अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उपचार के लिए उन्हें आंबेडकर अस्पताल लेकर आए थे।

बताया जा रहा है कि परिजन मरीज को लेकर सुबह पांच बजे आंबेडकर अस्पताल पहुंचे थे। उपचार के लिए मरीज को इमरजेंसी वार्ड में भेजा गया। इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टरों ने उन्हें जनरल वार्ड में भेजकर 2 बॉटल ग्लूकोज लगा दिया। इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ गई। परिजन ने मरीज को सोमवार को सुबह कीमोथेरेपी करवाने के लिए टोकन लिया और अंदर जाने लगे तो गार्ड ने संजीवनी कार्ड न होने की बात कहकर उनको वार्ड के अंदर नहीं जाने दिया।

हिमांशु साहू ने अस्पताल प्रबंधन के ऊपर आरोप लगाया है कि मरीज के पास संजीवनी कार्ड न होने की वजह से उन्हें वार्ड के अंदर दाखिल नहीं किया गया, जबकि सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के लिए मरीज के पास संजीवनी अथवा स्मार्ट कार्ड का होना आवश्यक नहीं है। उसके बाद भी मरीज का उपचार नहीं किया, जिससे उसकी सोमवार की सुबह साढ़े 11 बजे मौत हो गई।

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