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Pooja Sharma   2018-06-12

लोगों को जिंदगी का पाठ पढ़ाने वाले आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने की आत्महत्या

OnlineIndia डेस्क। अध्यात्मिक गुरु भय्यू महाराज (50) ने मंगलवार को अपने सिल्वर स्प्रिंग स्थित घर पर गोली मारकर खुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि उनके परिवार में संपत्ति को लेकर झगड़ा चल रहा था। बहस के बाद उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया और कनपटी पर गोली मार ली। वे जमींदार परिवार से थे। अध्यात्मिक गुरु बनने से पहले वे मॉडलिंग करते थे। सूत्रों के मुताबिक भय्यू महाराज का अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को उनके बापट चौराहे स्थित सूर्यादय आश्रम में रखा जाएगा।

बॉम्बे हॉस्पिटल के डॉ. राहुल पाराशर के मुताबिक भय्यू महाराज को जब अस्पताल लाया गया, उससे आधा घंटे पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। उन्हें दाईं कनपटी पर गोली लगी थी। वहीं इंदौर पुलिस के इंस्पेक्टर जयंत राठौड़ ने बताया कि भय्यूजी ने खुद को सिर में गोली मारी। अभी पता नहीं चल सका है कि भय्यूजी ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। अस्पताल में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। बता दें कि भय्यूजी राजनीति में गहरी पैठ रखते थे। हाल ही में शिवराज सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया था। हालांकि, उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि संतों के लिए पद का महत्व नहीं होता। हमारे लिए लोगों की सेवा का महत्व है

भय्यूजी महाराज को राजनीतिक रूप से ताकतवर संतों में गिना जाता था। उनका असली नाम उदयसिंह देशमुख था और उनके पिता महाराष्ट्र में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे हैं। उनका नाम तब चर्चा में आया था, जब भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे अन्ना हजारे को मनाने के लिए यूपीए सरकार ने उनसे संपर्क किया था। जवानी के दिनों में सियाराम शूटिंग शर्टिंग के लिए पोस्टर मॉडलिंग करने वाले संत भय्यूजी तलवारबाजी, घुड़सवारी और खेती का काम भी करते थे। साथ ही वह फेस रीडर भी थे।

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