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Pooja Sharma   2018-06-23

कार का साइड मिरर ऐसे सेट करने से अक्सर होते हैं एक्सीडेंट

OnlineIndia डेस्क। वो कहावत है ना नजर हटी दुर्घटना घटी इसलिए कार ड्राइविंग करते समय हमेशा छोटी-छोटी बातें ध्यान में रखनी चाहिए। ड्राइविंग के दौरान एक छोटी गलती से ही बड़े हादसे हो जाते हैं। कार की स्पीड हाइवे पर कितनी हो, दूसरी कार से कार की दूरी कितनी हो, ड्राइवर को हमेशा ऐसी बातें ध्यान में रखनी चाहिए। सबसे ज्यादा ड्राइविंग के दौरान अगर लोग गलती करते हैं तो वो होती है साइड मिरर सेट करने की।

कार के तीरों मिरर को कुछ इस तरह से सेट करना चाहिए जिससे पूरी तरह ब्लाइंड मिरर से बच सकते हैं। इसके अलावा कार में लगे सेंटर मिरर को इस तरह से सेट करना चाहिए कि उसमें कार का बैक पार्ट बीचों-बीच नजर आता रहे। ड्राइवर को साइड मिरर ऐसे सेट करने चाहिए, अगर कोई गाड़ी पीछे से ओवरटेक कर रही हो तो वह जब सेंटर मिरर में दिखना बंद हो जाए तो साइड मिरर में तुरंत दिखने लगे। लेकिन कई लोग ज्यादातर साइड मिरर को इस तरह से सेट करते हैं कि उसमें बैक पार्ट ज्यादा दिखाई नहीं दे पाता। इसी वजह से भी बराबर में चलने वाली गाड़ियां भी उसमें नजर नहीं आती। इसलिए साइड मिरर को कुछ इस तरह सेट करें कि सेंटर मिरर में ओवरटेक करने के बाद गाड़ी तुरंत साइड मिरर में नजर आए। इसके साथ ही बराबर में चलने वाली गाड़ियां भी साइड मिरर में दिखाई देती रहें।

कार चलाते समय ड्राइवर हमेशा पीछे वाले ऑब्जेक्ट को देखने के लिए तीन मिरर का इस्तेमाल करते हैं। इनमें पहला मिरर कार के अंदर सेंटर में मौजूद होता है। वहीं, दो मिरर कार के बाहर लेफ्ट और राइट में होते हैं। तीनों मिरर में कार के पीछे चलने वाली कारें या ओवरटेक करने वाली सभी गाड़ियां नजर आती हैं। ज्यादातर ड्राइवर मिरर की सेटिंग ऐसी कर देते हैं जिसमें पीछे चलने वाला ऑब्जेक्ट ठीक से दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति को ब्लाइंट स्पॉट कहते हैं और इसी के चलते सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं।

जब कोई कार, बाइक या अन्य कोई वाहन आपकी कार के पीछे से ओवरटेक करती है, तब वो सेंटर मिरर में दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही वह आपकी कार के बराबर आती है तब वह साइड मिरर में पल भर के लिए नहीं आती है। इसी स्थिति को ब्लाइंड स्पॉट कहते हैं।

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