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OnlineIndia   2018-07-11

मनरेगा: पंजीकरण के बाद भी बेरोजगार रह गए छत्तीसगढ़ के 13 लाख मजदूर

OnlineIndia रायपुर। छत्तीसगढ़ में मजदूरों के पलायन करने को लेकर हो-हल्ले के बीच एक सच यह भी है कि राज्य के 13 लाख मजदूरों को पंजीकरण के बाद भी मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में भी रोजगार नहीं मिल पाया। बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूर ऐसी ही परिस्थिति में रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हो रहे हैं।

आपको बता दें कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में वर्तमान में 38 लाख परिवार रजिस्टर्ड हैं, लेकिन सिर्फ 25 लाख परिवारों को ही रोजगार मिल पाया है। बाकी बचे 13 लाख मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पाया है। मनरेगा के तहत पिछले तीन सालों में किसी भी साल लगातार तीस दिन तक काम करने वाले मजदूरों को टिफिन देने की योजना बनाई गई है।

इस दायरे में 10 लाख 30 हजार मजदूर आ रहे हैं। अगस्त में इन मजदूरों को टिफिन दिया जाएगा। बाकी लोगों को न रोजगार मिला न टिफिन मिल पाएगा। हालांकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अफसरों का दावा है कि काम मांगने वाले मजदूरों को काम दिया जा रहा है।

प्रदेश में 2016-2017 में 38 लाख परिवारों के 82 लाख मजदूरों को मनरेगा के तहत रजिस्टर्ड किया गया। इसमें से मात्र 55 लाख मजदूरों को ही रोजगार मिल रहा है। 13 लाख बेरोजगार है। जिन्हें मनरेगा में काम मिला उनमें भी महज एक लाख 72 हजार 904 मजदूर ही ऐसे हैं जिन्हें सौ दिन से ज्यादा काम मिल पाया। यह स्थिति तब है जबकि मनरेगा में रजिस्टर्ड मजदूरों को साल भर में 150 दिन का रोजगार मुहैया कराने का नियम था।

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