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OnlineIndia   2018-07-19

शहीद वीरनारायण सिंह की जाति को लेकर उठा विवाद, SCERT पाठ्यपुस्तक में करेगा सुधार

OnlineIndia रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह को राजपूत बताने का विवाद गहराने के बाद अब राज्य के शिक्षा मंत्री इस मामले में आगे आए हैं। सोमवार को उन्होंने एक सर्कुलर जारी करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपरोक्त पाठ्य पुस्तक में शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार राजपूत की जगह उनका नाम शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार गोंड पढ़ा जाए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह पाठ्य पुस्तक पुरानी और त्रुटिपूर्ण है। इसे पाठ्य सामग्री से जल्द हटा लिया जाएगा। इसके स्थान पर शहीद वीर नारायण सिंह के विषय में सही तथ्यों को प्रकाशित किया जाएगा। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीइआरटी) द्वारा प्रकाशित कक्षा दसवीं की किताब में शहीद वीर नारायण सिंह का नाम शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार राजपूत लिखा गया है। यह मामला पहले भी सामने आया था लेकिन अब इसे लेकर आदिवासी समाज आक्रोशित है। आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार आदिवासियों की इतिहास-संस्कृति को बदलने की साजिश रच रही है।
मंत्री के इस आश्वासन के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम का कहना है कि यह आदिवासियों का अपमान है। हम शहीद वीर नारायण सिंह की पूजा करते हैं। उन्हें राजपूत बताया जाना गलत है। ऐसे तो ये मिनीमाता और गुरूघासीदास को भी राजपूत बता देंगे। नेताम ने कहा कि इस मामले में समाज ने बैठक की है। आदिवासी युवा संगठन ने पिछले दिनों इसे लेकर राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन और पुतला दहन किया था।
साल 2016 में भी उठा था विवाद
2016 में राज्य शिक्षा स्थाई समिति की बैठक में सदस्यों ने राजपूत शब्द हटाने का सुझाव दिया था लेकिन हटाया नहीं गया। इतिहासकार डॉण् रमेंद्रनाथ मिश्र के मुताबिक उनकी वीरता के कारण उन्हें राजपूत उपमा दी गई। यह जाति नहीं संबोधन बोधक शब्द है। मध्यप्रदेश सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग ने 1984 में एक पुस्तक प्रकाशित की थी। जिसमें वीर नारायण सिंह को राजपूत बताया गया। वहीं से दूसरी किताबों में यह शब्द आया।
इस पर छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि सर्व आदिवासी समाज की आपत्ति के बाद शहीद वीर नारायण सिंह की जीवनी संबंधित पाठ्य सामग्री में संशोधन को लेकर मैंने अधिकारियों से चर्चा की है। तत्काल प्रभाव से संशोधन करके बच्चों को उक्त पाठ पढ़ाने के लिए कहा गया है।

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