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Pooja Sharma   2018-08-05

Friendship day 2018: जानें महाभारत और बाइबिल में दोस्ती का क्या है मतलब

OnlineIndiaडेस्क। जीवन में मुख्य भूमिका निभाने वाले दोस्तों के लिए समर्पित फ्रैंडशिप डे की शुरुआत 1930 में तब हुई तब हालमार्क कार्ड्स के संस्थापक ज्यॉयस हाल ने दो अगस्त को लोगों के साथ छुट्टियां मनाकर की। इस पहले दोस्ती के नाम पर ग्रीटिंग कार्ड्स छापकर फ्रैंडशिप डे का प्रचार किया गया। हालांकि एक दावा यह भी है कि 1935 में पहली बार अमेरिकन कांग्रेस में मनाया गया है। इस दिन अगस्त के पहले रविवार को फ्रैंडशिप के डे के रूप में घोषित किया गया। इसके बाद हर साल इस दिन को एक वार्षिक उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।
वर्ल्ड फ्रैंडशिप डे क्रुसेड द्वारा 30 जुलाई 1958 को संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने के लिए प्रस्तावित किया गया। इसके बाद कई देशों में इसे विधिवत मनाया जाने लगा। 27 अप्रैल 2011 को संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली ने हर साल फ्रैंडशिप डे मनाने का ऐलान किया। अलग-अलग देशों में यह अलग-अलग तारीख को मनाया जाता है। कहीं 20 जुलाई को मनाया जाता है तो कहीं 30 जुलाई को। लेकिन भारत में यह अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है।
बाइबिल में फ्रैंडशिप
लोगों को फ्रैंडशिप मनाने का आइडिया इतना जमा कि इसे लोग हर साल बहुत ही उत्साह के साथ मनाने लगे। फ्रैंडशिप को पश्चिमी देशों को रिवाज भी माना जाता है। बाइबिल में फ्रैंडशिप का मतलब, एक ऐसा बंधन है जो इंसान में भरोसे की नींव डालता है। बाइबिल में दोस्ती के महत्व को व्याख्या करते हुए कहा गया है - कुछ मांगो तो आपको मिल जाए, जरूरत पर ढूंढ़ो तो आपको वह मिल जाए और जब भी आप दरवाजा खटखटाएं तो आपके लिए खुल जाए ऐसी होती है दोस्ती। वहीं ओल्ड टेस्टामेंट में संबंधों में अंतरंगता रखने वाले को ईश्वर का दोस्त कहा गया है।
महाभारत में दोस्ती
दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत में दोस्ती के का वर्णन करते हुए बताया गया है कि भगवान कृष्ण सखा के कई रंग रूप थे। वे लोगों को प्यार करते थे, उन्हें रास्ता दिखाते थे, लोगों के साथ हंसी ठिठोली करते थे। अपने आस-पास के लोगों में भाईचारे का भाव रखना, उनकी रक्षा करना और यहां तक कि उन्हें चिढ़ाना भी भगवान कृष्ण की दोस्ती के रूप थे।

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