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OnlineIndia   2018-08-10

40 फीसद सब्सिडी के बावजूद सिर्फ 657 घरों पर ही लग सका सोलर पैनल

OnlineIndia राज्य। जलवायु परिवर्तन को लेकर देशभर में चिंता की जा रही है। बिजली उत्पादन के लिए पावर प्लांट में लाखों टन कोयला हर महीने जल रहा है। ऐसे में सौर पावर विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि राजधानी में ढाई लाख घरों में सिर्फ सरकारी और गैर सरकारी मिलाकर अब तक 657 छतों पर सोलर पैनल प्लांट लग पाया है। राजधानी में सौर पैनल लगाने के लिए राज्य सरकार की ओर से दी जा रही 40 फीसद सब्सिडी का आकर्षण लोगों को नहीं लुभा पा रहा है।
शहर में 15.5 मेगावॉट सौर पावर का उत्पादन हो रहा है। एक किलोवॉट के प्लांट में चार यूनिट उत्पन्न् हो रही है। रायपुर में 1100 सौर प्लांट लगे हुए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अधिकारी लगातार इस पर फोकस कर रहे हैं, लेकिन जिला के नगर निगम अधिकारी व जिला प्रशासन के अफसरों का बेहतर सपोर्ट नहीं मिलने से सौर पावर का दायरा बढ़ नहीं पा रहा है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक 40 गीगावॉट सौर पावर देशभर में उत्पादन करना है। अभी तक 10 गीगावॉट तक सौर पावर उत्पन्न किया जा रहा है। बैंक लोन देने में तेजी लाएं तो इस सेक्टर में गति आएगी।

 

एक मेगावॉट सौर पैनल प्लांट लगाने के लिए साढ़े पांच से छह करोड़ रुपए खर्च आएगा। सौर पैनल प्लांट के अभी दो मॉडल हैं। अभी जिस मॉडल पर काम किया जा रहा है वह केपेक्स है। इसमें खर्चा भी ज्यादा आ रहा है। इसके तहत उत्पादित सौर पावर को खुद 70 प्रतिशत खर्च करना पड़ रहा है। सिर्फ 30 किलोवॉट सोलर पावर ही बेच सकते हैं लेकिन अब रेस्को मॉडल आ गया है। अब इसके इंस्टालेशन के लिए भवन मालिक अपना छत किराए पर दे सकेगा। एक मेगावॉट का पॉवर प्लांट लगाकर ज्यादा से ज्यादा घरों तक बिजली दी जा सकेगी।


क्रेडा (अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने घरों में सोलर पैनल प्लांट लगाने पर 40 फीसदी सब्सिडी देने का प्रावधान कर रखा है। इसके तहत एक लाख रुपए में लगने वाला एक किलोवॉट का सोलर प्लांट मात्र 60 हजार रुपए में किसी के भी घर पर लग जाएगा। सोलर पैनलों की उम्र 25 साल की होती है।

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