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  2017-08-20

आखिर कब तक होते रहेंगे इस तरह के हादसे

OnlineCG ब्यूरो। मुजफ्फरनगर के खतौली में सिस्टम की घोर लापरवाही के चलते शनिवार शाम कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस भीषण हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में अब तक 23 से ज्यादा लोगों के शव निकाले जा चुके हैं, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह हादसा इतना भयंकर था कि पटरी से उतरे 13 कोच एक-दूसरे पर जा चढ़े। इतना ही नहीं इनमें से एक पास बने मकान और दूसरा कॉलेज में जा घुसा। वहीं पता चला है कि ट्रैक पर दो दिनों से सिग्नलिंग का काम चल रहा है जिसके कारण शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस के ड्राइवर को कॉशन नहीं मिला। इसी का नतीजा था कि ढीली कपलिंग वाली पटरी पर ट्रेन 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरी और बेपटरी हो गई। आपको बता दें कि जानमाल की इतनी भारी हानि के बावजूद रेल अधिकारी लीपापोती में जुटे रहे। पुलिस-प्रशासन, एनडीआरएफ की टीम के साथ सेना राहत और बचाव में जुटी हुई है। यह हादसा पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय से 24 किमी दूर खतौली स्टेशन से पौने छः बजे गुजरी पर पटरी से उतर गई और कोच एक-दूसरे पर चढ़ गए। एस 2, एस 3, एस 4 कोच को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। एस 2 और एस 4 मकान और इंटर कालेज में घुसे हैं। पैंट्री कार से अभी तक किसी को नहीं निकाला जा सका है। तीन एसी कोच भी काफी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शी तीस से ज्यादा लोगों की मौत बता रहे हैं। मृतकों की संख्या इससे ज्यादा हो सकती है जबकि रेल प्रशासन ने सिर्फ 23 मौत की पुष्टि की है। घायलों को मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल और मेरठ मेडिकल कालेज भेजा गया है। रेलवे की राहत टीम और मेडिकल वैन मौके पर हैं। बचाव में आसपास के ग्रामीण भी जुटे हुए हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर देश में इस तरह के हादसे कब रुकेंगे।

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