Online Chhattisgarh

  2016-11-29

सरकार की समिति ने ठुकरा दिया छठवें वेतनमान की मांग

-कर्मचारी संघ ने बताया एकतरफा फैसला

 OnlineCG Rajdhani। प्रदेश के कर्मचारियों को इस साल जहां सातवें वेतनमान मिलने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं नगरीय निकाय के 10 हजार कर्मचारियों के छठवें वेतनमान पर ही संशय के बादल दिखाई दे रहे हैं। छठवे वेतनमान की मांग पर विचार करने के लिए सरकार की ओर से गठित समिति ने ठुकरा दिया है।

         छत्तीसगढ़ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में रिमाइंडर लगाने की घोषणा की है। कर्मचारी संघ की ओर से छठवां वेतनमान सहित 21 सूत्री मांगों पर विचार करने के लिए विभाग के विशेष सचिव डॉ. रोहित यादव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने फैसला किया है कि प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति अपने कर्मचारियों का वेतन, बिजली सहित अन्य खर्च उठाने में समर्थ नहीं है। रोज के इन खर्चों के लिए इन्हें सरकार के अनुदानों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं 8 हजार 781.18 करोड़ रुपए का कर्ज सरकार अलग चुका रही है। ऐसे में 168 में से 149 निकायों के कर्मचारियों को एरियर्स पर 131.88 करोड़ रुपए का भुगतान कर पाना संभव नहीं है।

कर्मचारी संघ ने विभाग की ओर से गठित इस समिति के फैसले को एक तरफा बताया है। संघ के महामंत्री विष्णु चंद्राकर का आरोप है कि समिति ने बगैर कर्मचारी संघ का पक्ष सुने तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर दिया है। चंद्राकर का दावा है कि राज्य सरकार जिस राशि को अनुदान बताती है असल में वह नगरीय निकायों के अपने हक की राशि है। अकेले चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में राज्य सरकार नगरीय क्षेत्रों से आठ सौ पचास करोड़ रुपये वसूलती है। यह राशि 100 फीसदी निकायों को स्थानांतरित होनी चाहिए, लेकिन सरकार इसे अनुदान के रूप में प्रदर्शित करती है। ऐसे ही नगरीय क्षेत्र में संचालित शराब दुकान, बार, होटल आदि की लाइसेंस फीस सहित कई अन्य शुल्क जिसे निकायों पर छोड़ना चाहिए, उसे सरकार वसूलती है और अनुदान के रूप में दर्शाती है। अमर अग्रवाल, मंत्री, नगरीय प्रशासन विभाग के अनुसार प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकाय सरकार की मदद के बगैर अपने कर्मचारियों का वेतन-भत्ता देने की क्षमता नहीं रखते, ऐसे में छठवां वेतन का बोझ बढ़ाने से बोझ और बढ़ेगा। हमने पहले ही नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर होने के लिए कहा है। निकाय अपनी आय बढ़ा लें, उसके बाद वे अपने कर्मचारियों को छठवां वेतनमान दें। सरकार पहले ही सारा खर्च उठा रही है। आठ हजार करोड़ से अधिक का कर्ज अलग है। ऐसे में विभाग की ओर से छठवां वेतनमान दे पाना संभव नहीं है। इस संबंध में विचार करने के लिए समिति बनाई थी। समिति ने हर पहलू पर विचार कर अपना फैसला दिया है।

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