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  2016-08-13

बुराइयों के खिलाफ संघर्षरत विशेष महिला ब्रिगेड को मिल सकता है एसपीओ का दर्जा

रायपुर।लोगों को नशे व कई तरह की बुराइयों से बचने व लोगों की भलाई के लिए कार्य करना महिला ब्रिगेड ‘महिला कमांडोज’ का पेशा है। एक दशक से शराब व अन्य बुराइयों के खिलाफ संघर्षरत विशेष महिला ब्रिगेड ‘महिला कमांडोज’ को जल्दी ही सुपर पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) का दर्जा दिया जा सकता है। इस संगठन को छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्वयंसेवी संगठन ने खड़ा किया था। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एसपीओ का विचार बालोद के पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख हुसैन का है। उन्होंने कमांडो की अवधारणा को नया आयाम देने के लिए यह विचार पेश किया। प्रायोगिक आधार पर, अभी लगभग 100 महिला कमांडो को एसपीओ बनाया गया है। हालांकि राज्य सरकार को लगभग 1000 एसपीओ बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। 2006 में महिला कमांडो की नींव वर्ष 2006 में जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता शमशाद बेगम ने रखी थी। उन्होंने इस समूह की शुरुआत अपने जन्म स्थान गंदेरदेही विकास ब्लॉक से की थी। यह इलाका तब अविभाजित दुर्ग जिले में आता था ओर अब बालोद में है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के लगभग 100 सदस्यों की ब्रिगेड के साथ इसकी शुरूआत की थी। अब लगभग 8000 महिलाएं इस खास किस्म के अभियान का हिस्सा हैं। महिला एसपीओ मरून रंग की साड़ी व टोपी के साथ हाथ में छड़ी लिये रहती हैं। बेगम ने बताया कि भावी पीढ़ियों को शराब की लत से मुक्त रखना महिला कमांडो का सिद्धांत है। ये महिलाएं चाहती हैं कि उनके बच्चों को उन समस्याओं से बचाया जाए, जो इन महिलाओं को अपने परिवार के पुरुष सदस्यों की शराब पीने की लत के कारण झेलनी पड़ी हैं।

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